Punjab Politices : केंद्र की अटल बिहारी वाजपेयी और मोदी सरकार में किसी समय सहयोगी रहा देश का 100 साल से भी अधिक पुराना राजनीतिक दल आज दोफाड़ हो गया। पंजाब की सियासत में शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के भीतर चल रही अंतर्कलह अब खुलकर सामने आ गई है। पार्टी के बागी धड़े ने श्री अकाल तख्त साहिब के पूर्व जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को अपने गुट का अध्यक्ष घोषित कर दिया है, जबकि बीबी सतवंत कौर को पंजाब के श्री अकाल तख्त द्वारा गठित पांच सदस्यीय समिति द्वारा आयोजित चुनाव में पार्टी की धार्मिक शाखा की अध्यक्ष चुना गया। यह कदम सुखबीर सिंह बादल की अगुवाई वाले शिअद के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि बागी धड़ा अब पार्टी के आधिकारिक अधिकार के लिए चुनाव आयोग के समक्ष दावा पेश करने की तैयारी में है।
श्री अकाल तख्त साहिब की तरफ से 2 दिसंबर 2024 को 7 सदस्यों की समिति बनाई गई थी। इस समिति के दो सदस्य हट गए थे। ऐसे में पांच सदस्यों की समिति रह गई थी। आज पांच मेंबर की कमेटी ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह को नए अकाली दल का अध्यक्ष चुना है। ऐसे में शिरोमनी अकाली दल को बड़ा झटका लगा है। अब नई पार्टी SAD के संविधान को अपनाकर चुनाव आयोग के सामने खुद को असली अकाली दल के रूप में प्रस्तुत करेगी, जिससे सुखबीर बादल के नेतृत्व वाली पार्टी को सीधी चुनौती मिलेगी।
सुखबीर बादल का जवाब
सुखबीर बादल ने बागी धड़े के इस कदम को “भाजपा द्वारा प्रायोजित साजिश” करार दिया है। उन्होंने कहा कि कुछ अवसरवादी तत्व केंद्रीय एजेंसियों के इशारे पर पार्टी को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सुखबीर ने श्री अकाल तख्त साहिब के प्रति अपनी निष्ठा जताते हुए सभी बागी नेताओं से मतभेद भुलाकर पंथ और पंजाब के हित में एकजुट होने की अपील की थी।
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