Yamunanagar : पूर्व INLD विधायक Dilbagh Singh और क्लोज माइनिंग व्यापारी कुलविंदर सिंह को पुनः सोमवार को गुरुग्राम के विशेष न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। प्रश्नों के लिए 14 दिनों के लिए पूछताछ के लिए प्रार्थना की गई। न्यायालय ने इन दोनों के साथ सात दिन के लिए उनकी क़ैद को स्वीकार किया।
न्यायालय में प्रस्तुत दस्तावेजों में, ED ने बताया कि Dilbagh Singh को अवैध खनन और नकली ई-रावण के माध्यम से धन धोने के लिए गिरफ्तार किया गया है। जिले के प्रतापनगर और बिलासपुर पुलिस स्टेशनों में इस जनसंघ को जोड़ा जा रहा है। इनमें से सभी Dilbagh Singh के संघ के साथ जुड़े हुए हैं।
पिछले गुरुवार से रविवार तक, ED ने पूर्व विधायक Dilbag Singh, उनके साथी और अन्य कई माइनिंग व्यापारियों के स्थानों पर छापे मारे थे। उन्हें और कुलविंद्र सिंह को रविवार को गिरफ्तार किया गया था। ED ने न्यायालय में भी बताया कि Dilbagh Singh ने जांच के दौरान सहयोग नहीं किया। Dilbagh Singh ने दल टीम को गुमराह करने की कोशिश की।
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नकली ई-रावण के आठ मामले दर्ज
जिले के बिलासपुर पुलिस स्टेशन में 16 फरवरी 2023 और 23 मार्च 2023 को खनन सामग्री की खरीददारी और बिक्री के मामले दर्ज किए गए थे। 2022 और 2023 में प्रतापनगर पुलिस स्टेशन में इस साल मामले दर्ज किए गए थे। इन सभी में, नकली ई-मेल के माध्यम से अवैध खनन के मामले दर्ज किए गए थे।
इनमें, उन प्लांट्स के लिए नकली ई-रिलीज जारी किए गए थे जो बंद थे। नकली ई-मेल के माध्यम से अवैध खनन के मामले का मामा बड़े पैम्बर में आया था। ऐसे बड़े पैम्बर में तैयारी की जा रही थी। उसके बाद ही इस स्केल के मामले के परीक्षण की तरफ ध्यान गया। कई मामलों में इसमें चर्खी चदड़ी समेत खनन सामग्री की खरीददारी दिखाई गई थी।
ED ने न्यायालय में कहा कि Dilbagh Singh यमुनानगर और आस-पास के जिलों में ‘मांझा ग्रुप’ के नाम से अवैध खनन संघ का संचालन कर रहे हैं। इस संघ का कार्यालय सेक्टर 15 के PS बिल्डटेक के नाम से है। इस कार्यालय से इस संघ के कई फर्मों के ई-वे बिल और चेक बुक मिले थे। इनमें सभी इस संघ का हिस्सा हैं।
छापा मारते समय इस कार्यालय से गुजरते समय, ई-मेल और साइनेचर्स के बहुत से फर्मों के नकली ई-रिलीज के लिए लिए गए थे, जो इस संघ का हिस्सा था।
छापा मारते समय, पूर्व विधायक के साथी सुखबीर के साथ अफिस के पुराने रिकॉर्ड बरामद किए गए थे। इसमें उनके पास तहसील अधिकारी को गुब्बारे में सुरक्षित करते हुए दिखाई दिया गया था। इसके बाद ही तहसील अधिकारी ने इस विवादित कागजात को सुरक्षित करने के लिए सील किया था।




